बैंगन की खेती करने के लिए, इन बातों का ध्यान रखना चाहिए:
बैंगन की खेती (Brinjal Farming) करने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करें:
1. जलवायु और भूमि चयन
बैंगन की खेती गर्म और आर्द्र जलवायु में अच्छी होती है।
उचित जल निकास वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी अच्छी होती है।
मिट्टी का pH मान 6.0-7.0 के बीच होना चाहिए।
2. प्रजातियाँ (Varieties)
लंबे बैंगन: पंत समर्थ, पंत रंगपुरी, बी.आर. 112
गोल बैंगन: पी.पी.एल., अरका नीमल, पूसा पर्पल क्लस्टर
हाइब्रिड प्रजातियाँ: अरका नवनीत, महिको हाइब्रिड, पूजा हाइब्रिड
3. बुवाई का समय
खरीफ: जून-जुलाई
रबी: अक्टूबर-नवंबर
ग्रीष्म: जनवरी-फरवरी
4. बीज की मात्रा और रोपाई
प्रति हेक्टेयर 300-500 ग्राम बीज की आवश्यकता होती है।
नर्सरी में 4-5 सप्ताह के पौधे तैयार कर मुख्य खेत में रोपाई करें।
5. खाद एवं उर्वरक
गोबर की खाद: 20-25 टन/हेक्टेयर
नाइट्रोजन (N): 100 किग्रा/हेक्टेयर
फॉस्फोरस (P): 50 किग्रा/हेक्टेयर
पोटाश (K): 50 किग्रा/हेक्टेयर
6. सिंचाई प्रबंधन
गर्मी में 4-5 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें।
सर्दी में 10-12 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें।
ड्रिप सिंचाई से पानी की बचत और उपज बढ़ती है।
7. रोग और कीट नियंत्रण
कीट: सफेद मक्खी, तना छेदक, फल छेदक
जैविक उपाय: नीम तेल (5ml/L पानी) का छिड़काव
रासायनिक उपाय: इमिडाक्लोप्रिड (0.3ml/L पानी)
रोग: उकठा रोग, अगेती झुलसा
नियंत्रण: कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (2.5g/L पानी) का छिड़काव
8. तुड़ाई और उत्पादन
60-90 दिनों में फल तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं।
औसत उपज: 250-500 क्विंटल/हेक्टेयर (प्रजाति के अनुसार)।
अगर आप ऑर्गेनिक तरीके से बैंगन की खेती करना चाहते हैं या अधिक उत्पादन के टिप्स चाहिए, तो बताइए! 😊