ज्वार की खेती से जुड़ी ज़रूरी बातें
1. जलवायु और मिट्टी:
ज्वार की खेती गर्म और शुष्क जलवायु में अच्छी होती है।
इसे हल्की रेतीली से लेकर भारी काली मिट्टी तक में उगाया जा सकता है।
उचित जल निकास वाली मिट्टी उपयुक्त होती है।
2. भूमि की तैयारी:
2-3 बार गहरी जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा बना लें।
जैविक खाद (गोबर की खाद या कंपोस्ट) मिलाकर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाएं।
3. बीज चयन और बुवाई:
उन्नत किस्में: सीएसवी 15, सीएसवी 17, मालदांडी, एसपीवी 1411 आदि।
बुवाई का सही समय: खरीफ में जून-जुलाई, रबी में अक्टूबर-नवंबर।
बीज दर: 8-10 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर।
बुवाई की गहराई: 2-3 सेमी।
कतार से कतार की दूरी: 25-30 सेमी।
4. खाद एवं उर्वरक:
नाइट्रोजन (N), फास्फोरस (P), पोटाश (K) का संतुलित उपयोग करें।
नाइट्रोजन: 80-100 किग्रा/हेक्टेयर (आधे बुवाई के समय और बाकी टॉप ड्रेसिंग में)।
फास्फोरस: 40-50 किग्रा/हेक्टेयर।
जैविक खाद का उपयोग करने से पैदावार बढ़ती है।
5. सिंचाई प्रबंधन:
वर्षा आधारित क्षेत्रों में अधिक सिंचाई की जरूरत नहीं होती।
सूखे की स्थिति में 2-3 सिंचाई करें (एक बुवाई के 25-30 दिन बाद और दूसरी फूल आने के समय)।
6. खरपतवार नियंत्रण:
बुवाई के 20-25 दिन बाद गुड़ाई करें।
फ्लुक्लोरालिन या एट्राजीन जैसे खरपतवार नाशकों का प्रयोग कर सकते हैं।
7. रोग और कीट नियंत्रण:
रोग: तना गलन, जड़ सड़न, अर्गट रोग।
नियंत्रण: फफूंदनाशक जैसे मैंकोजेब या कार्बेन्डाजिम का छिड़काव करें।
कीट: तना छेदक, माहू, फली छेदक।
नियंत्रण: नीम का तेल या कीटनाशक जैसे क्लोरोपायरीफॉस का प्रयोग करें।
8. कटाई और उपज:
ज्वार की फसल 100-120 दिन में तैयार होती है।
जब पौधों की पत्तियां सूखने लगें और दाने कठोर हो जाएं, तो कटाई करें।
औसत उपज: 25-30 क्विंटल/हेक्टेयर।
9. भंडारण:
फसल को अच्छी तरह सुखाकर भंडारण करें।
नमी 12% से कम होनी चाहिए ताकि अनाज सुरक्षित रहे।