मौसंबी की खेती करने के लिए, इन बातों का ध्यान रखना होता है:
मौसंबी (जो कि एक प्रकार की खट्टे फलों की किस्म है) की खेती करने के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना जरूरी है:
1. मौसंबी का चयन:
मौसंबी की कई किस्में होती हैं, जैसे कि नागपुर मौसंबी, विलायती मौसंबी आदि। इन किस्मों का चयन जलवायु और मिट्टी के हिसाब से करें।
2. जलवायु:
मौसंबी को उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय जलवायु की आवश्यकता होती है। यह गर्मी और आर्द्रता में अच्छा बढ़ता है।
अधिक ठंड या बर्फबारी वाले क्षेत्रों में इसकी खेती नहीं होती।
3. मिट्टी:
मौसंबी के लिए बलुई दोमट मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है।
मिट्टी का पीएच मान 6 से 7.5 के बीच होना चाहिए। मिट्टी में जल निकासी की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए।
4. रोपाई (पौधे लगाना):
पौधों की रोपाई का समय मानसून (जून से सितंबर) के बीच उपयुक्त होता है।
पौधों को 8-10 फीट की दूरी पर लगाएं। प्रत्येक गड्ढे का आकार लगभग 2 फीट × 2 फीट × 2 फीट होना चाहिए।
5. सिंचाई:
मौसंबी को नियमित सिंचाई की आवश्यकता होती है, खासकर गर्मियों में।
परंतु, ज्यादा पानी देने से जड़ों में सड़न हो सकती है, इसलिए अच्छी जल निकासी होनी चाहिए।
6. उर्वरक और पोषक तत्व:
रासायनिक उर्वरकों के साथ-साथ जैविक उर्वरकों का भी उपयोग करें।
नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की उचित मात्रा देना चाहिए। विशेष रूप से, वसंत और मानसून के दौरान खाद देने की जरूरत होती है।
7. सुरक्षा और देखभाल:
पौधों को कीटों और रोगों से बचाने के लिए नियमित रूप से कीटनाशक और फंगीसाइड का छिड़काव करें।
पौधों की शाखाओं को समय-समय पर छांटें ताकि हवा और सूरज की रौशनी अच्छे से पहुंचे।
8. फसल की देखभाल:
मौसंबी के पेड़ को समय-समय पर पानी देना और छांटना जरूरी होता है।
फूल आने के समय में ध्यान रखें कि फल पर किसी भी तरह का रोग न लगे।
9. संग्रहण और विपणन:
मौसंबी फल जब पूरी तरह से पके होते हैं (जो कि आमतौर पर सर्दी के अंत या वसंत में होते हैं) तो इसे तोड़ा जाता है।
ताजे फल के साथ-साथ मौसंबी का रस भी व्यावसायिक रूप से बेचा जा सकता है।
मौसंबी की खेती में सटीक ध्यान और देखभाल से अच्छा उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।