सरसों की खेती के लिए ज़रूरी बातेंः
सरसों की खेती (Mustard Farming) करने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करें:
1. उपयुक्त जलवायु और मिट्टी
जलवायु: सरसों की खेती के लिए ठंडी और शुष्क जलवायु उपयुक्त होती है। 10-25°C तापमान आदर्श होता है।
मिट्टी: दोमट या बलुई दोमट मिट्टी जिसमें जल निकासी अच्छी हो, सर्वोत्तम होती है। मिट्टी का pH 6.0-7.5 होना चाहिए।
2. खेत की तैयारी
खेत की गहरी जुताई करें और 2-3 बार हल्की जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा बना लें।
मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए गोबर की खाद या कम्पोस्ट डालें।
3. सरसों की उन्नत किस्में
उन्नत किस्में: पूसा बोल्ड, वरुणा, आरएच-749, जीरॉ-111, आरएच-30 आदि।
तेजी से बढ़ने वाली किस्में: पूसा महक, पूसा विजय, पूसा तारक।
4. बुवाई का समय और विधि
उत्तरी भारत में अक्टूबर-नवंबर में बुवाई करें।
पंक्ति से पंक्ति की दूरी 30-40 सेमी और पौधों के बीच 10-15 सेमी रखें।
बीज दर 4-6 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रखें।
बीजों को 3-4 सेमी की गहराई में बोएं।
5. उर्वरक प्रबंधन
नाइट्रोजन (N): 80-100 किग्रा/हेक्टेयर
फॉस्फोरस (P): 40-60 किग्रा/हेक्टेयर
पोटाश (K): 20-30 किग्रा/हेक्टेयर
सल्फर (S): 25-30 किग्रा/हेक्टेयर (तेल उत्पादन बढ़ाने के लिए)
6. सिंचाई प्रबंधन
बुवाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें।
फूल आने और दाना बनने की अवस्था में 1-2 सिंचाइयां आवश्यक हैं।
अत्यधिक सिंचाई से बचें क्योंकि सरसों की जड़ें ज्यादा पानी सहन नहीं कर पातीं।
7. रोग और कीट नियंत्रण
रोग: सफेद रतुआ, अल्टरनेरिया ब्लाइट, पाउडरी मिल्ड्यू
रोकथाम: रोगरोधी किस्में अपनाएं और मेंकोजेब या कार्बेन्डाजिम का छिड़काव करें।
कीट: अफीदी (माहू), पेंटेड बग, सरसों की सूंडी
रोकथाम: नीम तेल, इमिडाक्लोप्रिड 17.8% का छिड़काव करें।
8. कटाई और उपज
सरसों की फसल 110-140 दिनों में पक जाती है।
जब फलियों का रंग हल्का भूरा होने लगे तो कटाई करें।
थ्रेशिंग करके बीज अलग करें और धूप में सुखाकर भंडारण करें।
उपज 15-25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक प्राप्त हो सकती है।
9. लाभ और बाजार
सरसों का तेल, खली और हरी पत्तियां बाजार में अच्छी कीमत पर बिकती हैं।
जैविक खेती से अधिक लाभ संभव है।
सरसों की उन्नत खेती से अच्छा उत्पादन और मुनाफा कमाया जा सकता है। 🚜💰