मूली की खेती करने के लिए ज़मीन की तैयारी करनी होती है
मूली की खेती के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करें:
मिट्टी की तैयारी:
मूली की खेती के लिए हल्की और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है।
खेत की मिट्टी को 2-3 बार जुताई करके भुरभुरा बनाना चाहिए।
अगर मिट्टी में ठोसता हो तो उसमें गोबर की खाद या कम्पोस्ट डालें।
बीज की बुवाई:
मूली के बीज को सीधा खेत में बो सकते हैं या नर्सरी से तैयार पौधों को रोप सकते हैं।
बीजों की बुवाई 1 से 1.5 सेंटीमीटर की गहराई में करनी चाहिए।
बीजों के बीच 8-10 सेंटीमीटर की दूरी रखें।
सिंचाई:
मूली को नियमित पानी की आवश्यकता होती है, खासकर गर्मियों में।
बुवाई के बाद हल्की सिंचाई करें, और फिर हर 3-4 दिन में पानी दें। ध्यान रखें कि जल जमाव न हो।
खाद और उर्वरक:
मूली की खेती के लिए रासायनिक उर्वरकों के बजाय जैविक खाद का उपयोग करें।
बुवाई से पहले 20-25 टन गोबर की खाद डालें।
मूली के पौधों को बढ़ने के लिए नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की संतुलित मात्रा की आवश्यकता होती है।
निराई और गुड़ाई:
खेत में खरपतवार को हटाने के लिए निराई और गुड़ाई करते रहें।
यह पौधों की वृद्धि को उत्तेजित करता है और पोषक तत्वों को बेहतर तरीके से उपलब्ध कराता है।
संगठन और बुवाई के बीच का अंतराल:
मूली के पौधों के बीच अच्छे अंतराल का ध्यान रखें ताकि वे फैल सकें और अच्छा आकार प्राप्त कर सकें।
फसल की कटाई:
मूली की कटाई 30-40 दिन के बाद की जा सकती है।
मूली की जड़ें एक अच्छी आकार में विकसित हो जाएं, तब उसे काटकर बाहर निकाल लें।
रोग और कीट नियंत्रण:
मूली में आमतौर पर सफेद मक्खी, कीड़े और फफूंदी लग सकते हैं। इनसे बचाव के लिए जैविक कीटनाशक जैसे नीम का तेल या बर्फी के तेल का उपयोग करें।
मूली की खेती सही तरीके से करने पर अच्छे परिणाम मिलते हैं और यह फसल जल्द तैयार हो जाती है।