जौ (Barley) की खेती करने के लिए निम्नलिखित उपायों का पालन किया जा सकता है:
जौ (Barley) की खेती करने के लिए निम्नलिखित उपायों का पालन किया जा सकता है:
1. भूमि चयन:
जौ की खेती हल्की से लेकर मध्यम भूमि में की जा सकती है।
भूमि का पीएच मान 6-7 होना चाहिए।
अच्छी जलनिकासी वाली भूमि सर्वोत्तम होती है।
2. बीज का चयन:
जौ के अच्छे और उच्च गुणवत्ता वाले बीज का चयन करें।
बीज का अंकुरण दर 85% से ज्यादा होनी चाहिए।
3. भूमि की तैयारी:
खेत की अच्छे से जुताई करें ताकि मृदा में वायु संचार हो और जल निकासी सही रहे।
मिट्टी को समतल बनाकर अच्छे से पलटें, फिर हल्का तंग करें।
4. बीज बोने का समय:
जौ की बुवाई का सही समय अक्टूबर से नवंबर के बीच होता है, जब तापमान 20-25°C हो।
पहाड़ी क्षेत्रों में बुवाई का समय थोड़ा बदल सकता है।
5. बीज दर:
प्रति हेक्टेयर 80-100 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है।
6. बुवाई विधि:
जौ को पंक्ति विधि से बोना सबसे अच्छा होता है। पंक्तियाँ 22.5-30 सेंटीमीटर दूर रखें।
बीज को 4-5 सेंटीमीटर गहरे डालें।
7. सिंचाई:
जौ को ज्यादा पानी की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन सूखा न होने दें।
पहले सिंचाई बुवाई के बाद करें और फिर जरूरत के अनुसार अंतराल पर सिंचाई करें।
8. खाद और उर्वरक:
खेत की मिट्टी के अनुसार नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का उपयोग करें।
आमतौर पर 20-25 किलोग्राम नाइट्रोजन, 50 किलोग्राम फास्फोरस और 20-25 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर की जरूरत होती है।
9. नियंत्रण कीट और रोग:
जौ में रोगों और कीटों का प्रकोप हो सकता है, जैसे की भृंग और रस चूसक कीड़े।
नियमित निगरानी करें और आवश्यकता अनुसार कीटनाशक और फफूंदनाशक का छिड़काव करें।
10. कटाई:
जौ की कटाई 90-120 दिनों के भीतर होती है, जब पौधे का रंग हल्का पीला और तनों की पत्तियाँ सूख जाएं।
कटाई के बाद जौ को छाया में सुखाने के बाद थ्रेशिंग करें।
जौ की खेती से अच्छी पैदावार के लिए इन सभी कदमों का पालन करना जरूरी है।