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अमरूद की खेती के लिए ज़रूरी बातेंः

  • 03/02/2025

1. अमरूद की खेती के लिए ज़रूरी बातेंः
अमरूद की खेती उष्ण कटीबंधीय और उपोष्ण-कटीबंधीय जलवायु में की जा सकती है.
अमरूद के पौधे को पर्याप्त मात्रा में धूप मिलनी चाहिए.
अमरूद के पौधों को हफ़्ते में दो से तीन बार पानी देना चाहिए.
अमरूद के पौधों को रोगों से बचाना चाहिए.
अमरूद के पौधों को अच्छी तरह से छंटाई करनी चाहिए.
2. गुयावा (अमरूद) की खेती कैसे करें:

जलवायु और मिट्टी:

अमरूद की खेती के लिए उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय जलवायु सबसे उपयुक्त होती है।
दोमट मिट्टी (loamy soil) जिसमें जल निकासी अच्छी हो, सबसे अच्छी मानी जाती है।
मिट्टी का pH स्तर 5.5 से 7.0 के बीच होना चाहिए।
प्रजातियों का चयन:

मानसून (जुलाई-अगस्त) या वसंत (फरवरी-मार्च) के समय पौधों की रोपाई करें।
खेत की तैयारी:

खेत को अच्छी तरह जोतकर समतल कर लें।
60x60x60 सेमी के गड्ढे खोदें और 5-10 किलोग्राम गोबर की खाद या कम्पोस्ट मिलाएँ।
पौधारोपण:

पौधों के बीच 5-6 मीटर की दूरी रखें।
पौधे को गड्ढे में लगाकर मिट्टी से ढक दें और हल्की सिंचाई करें।
सिंचाई:

गर्मियों में 7-10 दिन के अंतराल पर और सर्दियों में 15-20 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें।
मानसून में जरूरत के हिसाब से सिंचाई करें।
खाद और उर्वरक:

साल में दो बार, जून और अक्टूबर में, 10-15 किलोग्राम गोबर की खाद, 300-400 ग्राम नाइट्रोजन, 100-150 ग्राम फॉस्फोरस और 150-200 ग्राम पोटाश प्रति पौधा डालें।
कटाई-छंटाई:

पुराने और सूखे टहनियों को समय-समय पर काटते रहें। इससे नए फूल और फल आने में मदद मिलेगी।
रोग और कीट नियंत्रण:

फल मक्खी और स्केल कीट से बचाव के लिए नीम का तेल छिड़क सकते हैं।
पत्तियों पर फफूंद दिखे तो कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव करें।
फसल की तुड़ाई:

पौधरोपण के 2-3 साल बाद फल देना शुरू हो जाता है।
फलों का रंग बदलने लगे (हरा से पीला) तो समझें कि फल तोड़ने का समय आ गया है।

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