सीताफल की खेती करने के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:
सीताफल की खेती कैसे करें?
सीताफल (Custard Apple) एक स्वादिष्ट और पोषक फल है, जिसे गर्म और शुष्क जलवायु में आसानी से उगाया जा सकता है। इसकी खेती करने के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:
1. जलवायु और मिट्टी
जलवायु: सीताफल गर्म और शुष्क जलवायु में अच्छा बढ़ता है। 25-35°C तापमान इसकी वृद्धि के लिए उपयुक्त होता है।
मिट्टी: अच्छी जलनिकासी वाली बलुई दोमट मिट्टी सर्वोत्तम रहती है। pH मान 6.5-7.5 हो तो बेहतर उत्पादन मिलता है।
2. उन्नत किस्में
बालानगर
अरका साहन
स्वीट कस्टर्ड
पिंक मैमथ
3. खेत की तैयारी और रोपाई
खेत की जुताई: पहली जुताई गहरी करनी चाहिए, फिर 2-3 बार हल्की जुताई करें।
गड्ढे तैयार करना: 60x60x60 सेमी आकार के गड्ढे 4x4 मीटर की दूरी पर खोदें।
खाद और उर्वरक: प्रति गड्ढे में 8-10 किलो गोबर खाद, 500 ग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट और 200 ग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश डालें।
पौधों की रोपाई: मानसून (जुलाई-अगस्त) में ग्राफ्टेड या बीज से तैयार पौधों को लगाया जाता है।
4. सिंचाई और देखभाल
सीताफल सूखे क्षेत्र का पौधा है, लेकिन गर्मियों में 15-20 दिन के अंतराल पर हल्की सिंचाई करनी चाहिए।
खरपतवार नियंत्रण के लिए समय-समय पर गुड़ाई करें।
फूल और फल बनने की अवस्था में अति जलभराव से बचें।
5. रोग और कीट नियंत्रण
फलों का सड़ना: तांबे वाले फफूंदनाशक का छिड़काव करें।
फल छेदक कीट: नीम का तेल या कार्बेरिल 50 WP का छिड़काव करें।
जड़ गलन रोग: ट्राइकोडर्मा या बोर्डो मिक्सचर का उपयोग करें।
6. फल उत्पादन और तुड़ाई
पौध रोपाई के 3-4 साल बाद फल देना शुरू कर देते हैं।
फल अगस्त से अक्टूबर के बीच पकते हैं।
पूरी तरह पकने से पहले हल्के हरे रंग में तुड़ाई करें, ताकि ट्रांसपोर्ट में नुकसान न हो।
7. उपज और लाभ
एक हेक्टेयर में करीब 5-10 टन फल उत्पादन संभव है।
बाजार में इसकी अच्छी मांग रहती है, जिससे किसानों को अच्छा मुनाफा होता है।
निष्कर्ष
सीताफल की खेती कम पानी में अधिक लाभ देने वाली होती है। सही किस्म, उचित देखभाल और सही समय पर तुड़ाई से बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
अगर आपको सीताफल की खेती से जुड़ी कोई और जानकारी चाहिए, तो बताएं! 😊