कपास की खेती के लिए ध्यान रखना होता है
जलवायु और मिट्टी
कपास की खेती के लिए गर्म और शुष्क जलवायु उपयुक्त होती है।
6.0 से 7.5 pH वाली दोमट और काली मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है।
अच्छी जल निकासी वाली भूमि होनी चाहिए।
2. उन्नत किस्में
हाइब्रिड कपास: एच-4, एच-6, बीटी कपास
देशी किस्में: केसी-2, एलआर-21, नरमा, सूरज
3. बुवाई का समय
उत्तरी भारत में अप्रैल से जून
दक्षिणी और पश्चिमी भारत में मई से जुलाई
बीटी कपास की बुवाई मानसून आने से पहले करें।
4. बीज उपचार और बुवाई
बीज को थायरम या कार्बेन्डाजिम से उपचारित करें।
कतार से कतार की दूरी 60-75 सेमी और पौधों के बीच 30-45 सेमी रखें।
5. उर्वरक एवं खाद
प्रति हेक्टेयर 10-15 टन गोबर की खाद डालें।
नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश का संतुलित उपयोग करें (120:60:60 किग्रा/हेक्टेयर)।
6. सिंचाई प्रबंधन
कपास को 5-7 सिंचाइयों की जरूरत होती है।
फूल और फली बनने के समय उचित नमी जरूरी है।
ड्रिप इरिगेशन अपनाना फायदेमंद हो सकता है।
7. खरपतवार और कीट नियंत्रण
खरपतवार नियंत्रण: निराई-गुड़ाई करें या मेटोलाक्लोर/पेंडीमेथालिन का छिड़काव करें।
कीट:
गुलाबी सुंडी → बाविस्टिन या ट्राइकोग्राम्मा का प्रयोग करें।
सफेद मक्खी → इमिडाक्लोप्रिड या एसिटामिप्रिड का छिड़काव करें।
8. फसल कटाई और उत्पादन
फसल पकने के बाद 150-180 दिनों में तुड़ाई करें।
एक हेक्टेयर में औसतन 20-30 क्विंटल कपास का उत्पादन हो सकता है।
9. बाजार और लाभ
मंडी में अच्छे दाम पाने के लिए सूखे और साफ कपास की बिक्री करें।
कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की जानकारी लें।
अगर आप कपास की खेती से अच्छा मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो आधुनिक तकनीकों जैसे ड्रिप इरिगेशन और जैविक खेती को अपनाएं।