अगर आप सांवा की खेती करना चाहते हैं, तो निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें:
सांवा (Barnyard Millet) एक महत्वपूर्ण लघु अनाज है, जिसे सूखा प्रभावित और कम उपजाऊ भूमि पर उगाया जाता है। अगर आप सांवा की खेती करना चाहते हैं, तो निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें:
1. जलवायु और मिट्टी
जलवायु: सांवा की खेती के लिए शुष्क और उपोष्णकटिबंधीय जलवायु सबसे उपयुक्त होती है। यह 25-35°C तापमान में अच्छी तरह बढ़ता है।
मिट्टी: हल्की दोमट, बलुई दोमट और मध्यम उपजाऊ मिट्टी उपयुक्त होती है। अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी में इसका उत्पादन अधिक होता है।
2. बुवाई का समय
खरीफ मौसम में जून से जुलाई
रबी मौसम में सिंचित क्षेत्रों में सितंबर से अक्टूबर
गर्मी के मौसम में फरवरी से मार्च
3. बीज की मात्रा और बुवाई का तरीका
बीज की मात्रा: 4-5 किग्रा प्रति एकड़
कतार से कतार की दूरी: 20-25 सेमी
पौधे से पौधे की दूरी: 8-10 सेमी
बुवाई विधि: छिड़काव या कतारों में बुवाई की जाती है
4. उर्वरक एवं खाद
जैविक खेती के लिए गोबर खाद या वर्मीकम्पोस्ट का प्रयोग करें।
20:10:10 (NPK) के अनुपात में उर्वरक डालें।
नाइट्रोजन की आधी मात्रा बुवाई के समय और बाकी 30-35 दिन बाद दें।
5. सिंचाई प्रबंधन
वर्षा आधारित खेती में सिंचाई की आवश्यकता कम होती है।
अगर बारिश नहीं होती, तो 2-3 सिंचाई करें – पहली बुवाई के समय और दूसरी फूल आने पर।
6. प्रमुख रोग और कीट नियंत्रण
झुलसा रोग और तना गलन रोग से बचाव के लिए रोगरोधी बीज का चयन करें।
जैविक कीटनाशकों जैसे नीम तेल और ट्राइकोडर्मा का उपयोग करें।
7. कटाई और उत्पादन
फसल 70-80 दिनों में तैयार हो जाती है।
कटाई के बाद दानों को अच्छी तरह सुखाकर भंडारण करें।
8. लाभ और उपयोग
यह ग्लूटेन-फ्री अनाज है, जिससे डायबिटीज और हृदय रोगियों के लिए अच्छा माना जाता है।
सांवा से खिचड़ी, उपमा, दलिया, और आटा तैयार किया जाता है।
अगर आप अधिक जानकारी चाहते हैं, तो बताइए! 😊