यदि आप गाजर की खेती करना चाहते हैं, तो निम्नलिखित बिंदुओं को ध्यान में रखें:
गाजर की खेती (Carrot Farming) भारत में एक महत्वपूर्ण जड़ वाली फसल है, जिसे रबी मौसम (सर्दियों) में उगाया जाता है। यदि आप गाजर की खेती करना चाहते हैं, तो निम्नलिखित बिंदुओं को ध्यान में रखें:
1. जलवायु और मिट्टी:
गाजर ठंडी जलवायु में अच्छी तरह बढ़ती है। तापमान 15-25°C सबसे उपयुक्त होता है।
दोमट (Loamy) मिट्टी जिसमें जल निकासी अच्छी हो और pH स्तर 6.0-7.5 के बीच हो, सबसे बेहतर होती है।
2. गाजर की उन्नत किस्में:
प्रारंभिक किस्में: पूसा रुधिरा, पूसा केसर, नंथिया रेड
मुख्य मौसम की किस्में: पूसा यमुनी, जापानी रेड, कृष्णा, कनाडा रेड
हाइब्रिड किस्में: कल्याणपुर ऑरेंज, हाइजेन
3. बुवाई का समय:
उत्तरी भारत में अक्टूबर-नवंबर सबसे अच्छा समय है।
दक्षिणी और पश्चिमी भारत में बुवाई सितंबर से फरवरी तक की जा सकती है।
4. बीज की मात्रा और बुवाई विधि:
प्रति हेक्टेयर 4-6 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है।
कतारों के बीच 30-45 सेमी और पौधों के बीच 5-7 सेमी की दूरी रखें।
बुवाई के लिए छिड़काव (Broadcasting) या कतार पद्धति (Line Sowing) अपनाई जा सकती है।
5. उर्वरक और खाद प्रबंधन:
गोबर की खाद या कंपोस्ट 25-30 टन/हेक्टेयर
नाइट्रोजन (N) 50-60 किग्रा/हेक्टेयर
फास्फोरस (P) 40-50 किग्रा/हेक्टेयर
पोटाश (K) 40 किग्रा/हेक्टेयर
6. सिंचाई प्रबंधन:
बीज अंकुरण के लिए पहली हल्की सिंचाई आवश्यक है।
7-10 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें।
ज्यादा पानी से बचें, जिससे जड़ें खराब न हों।
7. खरपतवार नियंत्रण:
2-3 बार निराई-गुड़ाई करें।
मल्चिंग करने से नमी बनी रहती है और खरपतवार कम होते हैं।
8. रोग एवं कीट नियंत्रण:
कीट: एफिड, कटवर्म, व्हाइट ग्रब – रोकथाम के लिए जैविक या रासायनिक कीटनाशक का प्रयोग करें।
रोग: पत्ती धब्बा रोग, जड़ गलन – बोर्डो मिश्रण या कार्बेन्डाजिम का छिड़काव करें।
9. फसल कटाई:
गाजर की फसल 80-100 दिन में तैयार हो जाती है।
अच्छी तरह विकसित और गहरी रंग की गाजर की खुदाई करें।
10. उत्पादन और बाजार:
प्रति हेक्टेयर 250-400 क्विंटल उत्पादन हो सकता है।
गाजर को ताजा बाजार, प्रोसेसिंग इंडस्ट्री और एक्सपोर्ट के लिए बेचा जा सकता है।
अगर आप गाजर की खेती से जुड़ी और जानकारी चाहते हैं, तो बताइए! 😊