मेथी (Fenugreek) की खेती के लिए निम्नलिखित विधियाँ अपनाई जा सकती हैं:
मेथी (Fenugreek) की खेती के लिए निम्नलिखित विधियाँ अपनाई जा सकती हैं:
1. भूमि चयन
मेथी की खेती के लिए हल्की और उपजाऊ बलुई मिट्टी उत्तम मानी जाती है।
pH मान 6 से 7 के बीच हो तो सर्वोत्तम है।
अच्छे जल निकासी वाली भूमि का चयन करें, ताकि पानी रुक न जाए।
2. बुवाई का समय
मेथी की बुवाई रबी मौसम में (अक्टूबर से नवम्बर) की जाती है।
बुवाई के लिए उचित तापमान 20-25°C होता है।
3. बीज की तैयारी और बुवाई
बीजों का 24 घंटे पहले पानी में भिगोकर, फिर छाया में सुखाना अच्छा रहता है।
बीजों की बुवाई पंक्तियों में की जाती है। पंक्तियों के बीच 15 से 20 सेंटीमीटर की दूरी रखी जाती है।
बीजों की गहरीाई 2-3 सेंटीमीटर होती है।
4. खाद और उर्वरक
खेत में गोबर की खाद 5-10 टन प्रति हेक्टेयर डालें।
नाइट्रोजन, फास्फोरस, और पोटाश की उचित मात्रा का उपयोग करें (उदाहरण के लिए, 20 किलो नाइट्रोजन, 40 किलो फास्फोरस, और 20 किलो पोटाश प्रति हेक्टेयर)।
5. सिंचाई
बीजों की बुवाई के बाद हल्की सिंचाई करनी चाहिए।
बाद में, मेथी को नियमित रूप से सिंचाई की आवश्यकता होती है, लेकिन जल भराव से बचना चाहिए।
6. खरपतवार नियंत्रण
खरपतवार को नियमित रूप से निकालें, क्योंकि ये मेथी की वृद्धि में रुकावट डाल सकते हैं।
गुड़ाई और निराई करते समय, खेत को साफ रखें।
7. फसल की देखभाल
फसल के आकार और वृद्धि को ध्यान में रखते हुए हल्की खाद देने की आवश्यकता होती है।
रोग और कीटों से बचाव के लिए उचित कीटनाशक का उपयोग करें।
8. कटाई
मेथी की फसल लगभग 60 से 70 दिन में तैयार हो जाती है।
जब पत्तियाँ पीली पड़ने लगें और बीज पकने लगें, तब कटाई करनी चाहिए।
मेथी की अच्छी खेती करने के लिए मौसम, मिट्टी, और सिंचाई का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है।