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लोबिया की खेती के लिए, ज़रूरी तैयारी और कदम ये रहे:

  • 04/02/2025

लोबिया (Lobia), जिसे आमतौर पर "ब्लैक-आईड बीन्स" या "काउपी" कहा जाता है, एक लोकप्रिय और पौष्टिक दाल है जो खासकर गर्मियों में उगाई जाती है। लोबिया की खेती के लिए निम्नलिखित कदमों का पालन किया जा सकता है:

1. मिट्टी और जलवायु
लोबिया की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली हल्की दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है।
गर्म और शुष्क जलवायु में इसकी अच्छी वृद्धि होती है। तापमान 25 से 35 डिग्री सेल्सियस तक सबसे उपयुक्त रहता है।
2. बीज की तैयारी
लोबिया की बुआई के लिए बीज की गुणवत्ता बहुत महत्वपूर्ण है। अच्छे गुणवत्ता वाले बीजों का चयन करें जो स्वस्थ और साफ हों।
बीजों को बुवाई से पहले 24 घंटे पानी में भिगोकर रखा जा सकता है ताकि उनका अंकुरण बेहतर हो।
3. बुवाई का समय
लोबिया की बुवाई मुख्य रूप से मानसून से पहले (मई से जुलाई) की जाती है।
4. बुवाई की विधि
बीजों को 3-4 इंच की गहराई में बोने की सलाह दी जाती है।
बुवाई के दौरान पंक्तियाँ 30 से 45 सेंटीमीटर की दूरी पर रखें।
5. सिंचाई
लोबिया के पौधों को नियमित रूप से सिंचाई की आवश्यकता होती है, लेकिन अधिक पानी से बचें, क्योंकि इससे जड़ सड़ सकती है।
बुवाई के बाद पहले 15-20 दिनों तक हल्की सिंचाई करें, फिर फसल के अनुसार पानी दें।
6. खाद और उर्वरक
उर्वरक के रूप में जैविक खाद जैसे गोबर की खाद का उपयोग करें।
नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का संतुलित अनुपात फसल के लिए अच्छा होता है। बुवाई से पहले जमीन में उर्वरक मिलाने से वृद्धि अच्छी रहती है।
7. निराई-गुड़ाई
फसल में खरपतवार की बढ़ोतरी रोकने के लिए निराई-गुड़ाई करें।
पहली निराई बुवाई के 20-30 दिन बाद करें।
8. कीट और रोग नियंत्रण
लोबिया में आमतौर पर तंबाकू के कीड़े, मच्छर, और कीटों से समस्याएँ हो सकती हैं।
कीटनाशक और जैविक उपचार का इस्तेमाल करें, जैसे नीम के तेल का छिड़काव या अन्य प्राकृतिक कीटनाशक।
9. कटाई
लोबिया की फसल को 60-70 दिन बाद जब फल पूरी तरह से पक जाएं, काट लिया जाता है।
कटाई के बाद बीजों को अच्छी तरह से सुखाकर ही इस्तेमाल करें।
10. उपज और विपणन
एक एकड़ में लगभग 6 से 8 क्विंटल उपज मिल सकती है, यह मौसम और खेती की तकनीक पर निर्भर करता है।
फसल को बाजार में भेजने से पहले अच्छी पैकिंग और प्रमाणीकरण करें ताकि गुणवत्ता बनी रहे।
लोबिया की खेती अपेक्षाकृत आसान है और इसकी उपज भी अच्छी होती है, जो किसानों के लिए अच्छा आर्थिक लाभ प्रदान कर सकती है।

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