करेले की खेती कैसे करें?
करेले की खेती करने के लिए, खेत की तैयारी, बुआई का समय, बीजों का उपचार, और उर्वरक का इस्तेमाल करना ज़रूरी होता है. करेले की खेती के लिए, इन बातों का ध्यान रखें:
करेले की बुवाई दो तरीके से की जाती है; एक सीधे बीज से और दूसरा नर्सरी विधि से। नदियों के किनारे की ज़मीन करेले की खेती के लिए अच्छी होती है। फसल में अच्छी वृद्धि, फूल और फलन के लिए 25 से 35 डिग्री सेंटीग्रेड का तापमान सही माना जाता है। बीजों के अंकुरण के लिए 22 से 25 डिग्री सेंटीग्रेड का ताप अच्छा होता है।
अगर आप करेला (Bitter Gourd) की खेती करना चाहते हैं, तो आपको इसकी खेती के लिए सही जलवायु, मिट्टी, बीज, और देखभाल की जानकारी होनी चाहिए।
करेले की खेती कैसे करें?
1. जलवायु और तापमान
करेला गर्म जलवायु की फसल है और इसे उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में उगाया जा सकता है।
इसके लिए 25-35°C का तापमान उपयुक्त होता है।
अधिक ठंडे मौसम में इसकी वृद्धि धीमी हो जाती है।
2. मिट्टी का चयन
अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है।
मिट्टी का pH स्तर 6.0 से 7.5 होना चाहिए।
जैविक खाद या गोबर की खाद डालने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है।
3. बीज बोने का सही समय
ग्रीष्मकालीन फसल: फरवरी-मार्च
वर्षा कालीन फसल: जून-जुलाई
सर्दियों की फसल: सितंबर-अक्टूबर (गर्म क्षेत्रों में)
4. बीज की बुवाई और दूरी
बीज बोने से पहले 24 घंटे पानी में भिगो लें।
बीजों को 1.5-2.0 सेमी गहराई में बोएं।
कतार से कतार की दूरी 1.5-2.0 मीटर और पौधे से पौधे की दूरी 30-45 सेमी रखें।
5. खाद और उर्वरक
15-20 टन गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर डालें।
नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की संतुलित मात्रा दें (NPK 50:30:30 किलो प्रति हेक्टेयर)।
समय-समय पर जैविक खाद और वर्मीकम्पोस्ट का उपयोग करें।
6. सिंचाई और जल प्रबंधन
गर्मी के मौसम में 4-5 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें।
वर्षा के मौसम में जलभराव से बचाव करें।
7. खरपतवार नियंत्रण
समय-समय पर खेत की गुड़ाई करें।
मल्चिंग करने से नमी बनी रहती है और खरपतवार कम होते हैं।
8. कीट और रोग नियंत्रण
कीट: लाल कद्दू बीटल, एफिड्स, थ्रिप्स
नियंत्रण: नीम तेल या जैविक कीटनाशकों का उपयोग करें।
रोग: पाउडरी मिल्ड्यू, डाउनी मिल्ड्यू
नियंत्रण: बोर्डो मिश्रण या सल्फर फफूंदनाशक का छिड़काव करें।