तरबूज़ की खेती के लिए ज़रूरी तैयारी और तरीके ये रहे
तरबूज की खेती करने के लिए आपको कुछ खास बातों का ध्यान रखना होता है। यहां पर तरबूज की खेती की प्रक्रिया के बारे में बताया जा रहा है:
1. भूमि की तैयारी
भूमि का चयन: तरबूज के लिए हल्की और रेतीली मिट्टी सबसे उत्तम रहती है। भूमि में जल निकासी अच्छी होनी चाहिए।
जुताई: सबसे पहले भूमि को अच्छे से जुताई कर लें और फिर उसे समतल कर दें।
2. बीज की चयन और बोने का समय
बीज का चयन: उन्नत और स्वस्थ बीज का चयन करें। बाजार में कई प्रकार के तरबूज के बीज उपलब्ध होते हैं।
बीज बोने का समय: भारत में सामान्यतः मार्च से मई तक का समय तरबूज की बुआई के लिए सर्वोत्तम रहता है।
3. बीज बोने की विधि
बीज को सीधे खेत में बोया जा सकता है। छेद में 2-3 बीज डालें और फिर उसे मिट्टी से ढक दें।
एक मीटर की दूरी पर प्रत्येक पौधा लगाएं। पौधों के बीच पर्याप्त स्थान होना चाहिए ताकि उनकी जड़ें अच्छी तरह से फैल सकें।
4. सिंचाई
शुरूआत में बीजों को ठीक से गीला रखें। जब पौधे बढ़ने लगें, तो सिंचाई की आवश्यकता होती है। गर्मी के दिनों में अधिक पानी की आवश्यकता हो सकती है, लेकिन जलभराव से बचें।
5. खाद और उर्वरक
तरबूज की खेती में जैविक खाद का उपयोग अच्छा रहता है। बुवाई के दौरान सही मात्रा में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश खाद का उपयोग करें।
आवश्यकता अनुसार उर्वरक का प्रयोग करें।
6. कीट नियंत्रण
तरबूज पर कीटों और रोगों का असर हो सकता है। इसलिए समय-समय पर कीटनाशक और फंगीसाइड्स का छिड़काव करें।
7. पौधों का रखरखाव
पौधों को समय-समय पर खरपतवार से मुक्त रखें।
वांछित आकार प्राप्त करने के लिए पौधों की ट्रिमिंग करें।
8. फसल की कटाई
तरबूज की फसल आमतौर पर 2-3 महीने में तैयार हो जाती है।
फसल तब तैयार मानी जाती है जब उसकी त्वचा सख्त हो जाए और वह एक हलका "ध्वनि" पैदा करे जब उंगली से उस पर मारा जाए।