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सौंफ़ की खेती करना एक लाभकारी कृषि व्यवसाय हो सकता है! आइए इस पर विस्तार से बात करते हैं।

  • 05/02/2025

सौंफ़ की खेती करना एक लाभकारी कृषि व्यवसाय हो सकता है! आइए इस पर विस्तार से बात करते हैं।

सौंफ़ की खेती (Fennel Farming) के लिए मार्गदर्शिका:

जलवायु और मिट्टी:

सौंफ़ की खेती के लिए समशीतोष्ण जलवायु उपयुक्त होती है। 20-25 डिग्री सेल्सियस तापमान इसके लिए आदर्श है।
दोमट या हल्की बलुई मिट्टी, जिसका pH स्तर 6.5-7.5 हो, सबसे अच्छी होती है।
बुवाई का समय:

उत्तर भारत में इसकी बुवाई अक्टूबर से नवंबर के बीच की जाती है।
दक्षिण भारत में फरवरी-मार्च का समय उपयुक्त होता है।
बीज की तैयारी और बुवाई:

एक हेक्टेयर के लिए करीब 8-10 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है।
बीजों को 2-3 सेंटीमीटर की गहराई पर बोया जाता है, और पंक्तियों के बीच 30-45 सेंटीमीटर की दूरी रखी जाती है।
सिंचाई:

पहली सिंचाई बुवाई के तुरंत बाद करनी चाहिए।
इसके बाद, मिट्टी के अनुसार 10-15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें। फूल आने के समय और दाना बनने के समय विशेष ध्यान रखें।
खाद और उर्वरक:

खेत तैयार करते समय गोबर की खाद या कम्पोस्ट डालें।
नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, और पोटाश की उचित मात्रा का उपयोग करें।
रोग और कीट प्रबंधन:

एफिड्स (महीन कीड़े) और पाउडरी मिल्ड्यू जैसे रोगों से बचाने के लिए जैविक या रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग करें।
समय-समय पर निराई-गुड़ाई करते रहें।
कटाई:

सौंफ़ की कटाई तब की जाती है, जब पौधे के पत्ते पीले होने लगें और बीज पूरी तरह पक जाएं।
कटाई के बाद बीजों को छाया में सुखाएं और फिर थ्रेसिंग करें।
भंडारण:

सूखे बीजों को अच्छी तरह से साफ करके हवा-बंद बोरियों में रखें।
नमी रहित और ठंडी जगह पर भंडारित करें।
क्या आप इस जानकारी में कुछ और विस्तार चाहते हैं, जैसे कि आर्थिक पहलू या विशेष खेती तकनीक? या अगर आपके पास कोई खास सवाल है, तो वह भी बता सकते हैं! 🚜

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