हल्दी की खेती करने का तरीकाः
हल्दी की खेती के लिए सही किसान और खेती के तरीके का चुनाव करना महत्वपूर्ण है। यदि आप हल्दी की खेती करना चाहते हैं, तो निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदुओं का ध्यान रखें:
हल्दी की खेती के लिए उपयुक्त क्षेत्र
हल्दी की खेती गर्म और आर्द्र जलवायु में अच्छी होती है।
1500 से 2500 मिमी वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्र सर्वोत्तम होते हैं।
दोमट या बलुई दोमट मिट्टी जिसमें जैविक पदार्थ अधिक हो, हल्दी के लिए अच्छी मानी जाती है।
जल निकास की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए ताकि जलभराव न हो।
उन्नत किस्में
हल्दी की खेती के लिए कुछ प्रमुख उन्नत किस्में हैं:
राजेन्द्र सोनहल्दी-1
सुगंधा
कृष्णा
सुश्री
प्रभा
आयुष
एलोरा (तेल की मात्रा अधिक होती है)
बीज की बुवाई
हल्दी की खेती के लिए बीज के रूप में कंद (राइजोम) का उपयोग किया जाता है।
एक हेक्टेयर खेत के लिए लगभग 2000 से 2500 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है।
बीज को 30-40 सेमी की दूरी पर और 5-7 सेमी गहराई में लगाया जाता है।
खाद और उर्वरक
20-25 टन गोबर की खाद या जैविक खाद प्रति हेक्टेयर डालें।
नाइट्रोजन (N) - 125 किग्रा, फॉस्फोरस (P) - 50 किग्रा, पोटाश (K) - 100 किग्रा प्रति हेक्टेयर प्रयोग करें।
जैविक खेती के लिए गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट, नीम खली आदि का उपयोग करें।
सिंचाई और देखभाल
वर्षा आधारित क्षेत्रों में सिंचाई की आवश्यकता कम होती है।
शुष्क क्षेत्रों में 7-10 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें।
खरपतवार नियंत्रण के लिए समय-समय पर निराई-गुड़ाई करें।
फसल को फफूंद और कीटों से बचाने के लिए जैविक कीटनाशकों का प्रयोग करें।
खुदाई और उत्पादन
हल्दी की फसल 7-9 महीने में तैयार हो जाती है।
जब पौधों के पत्ते पीले पड़ने लगें तो हल्दी खुदाई के लिए तैयार होती है।
खुदाई के बाद हल्दी को उबालकर सुखाया जाता है और फिर बाजार में बेचा जाता है।
औसतन उत्पादन 25-30 टन प्रति हेक्टेयर होता है।
हल्दी की खेती से लाभ
हल्दी का बाजार मूल्य अधिक होता है और जैविक हल्दी की मांग तेजी से बढ़ रही है।
औसतन 1 हेक्टेयर में 3-5 लाख रुपये तक का शुद्ध लाभ मिल सकता है।
सरकार भी हल्दी की खेती के लिए सब्सिडी और सहायता योजनाएं प्रदान करती है।
यदि आप हल्दी की खेती में रुचि रखते हैं तो क्षेत्र के कृषि विशेषज्ञों से संपर्क करें और नवीनतम तकनीकों की जानकारी प्राप्त करें। 🚜🌿