. गिलकी की खेती के लिए, इन बातों का ध्यान रखें:
गिलकी (तुरई) की खेती पोषक तत्वों से भरपूर सब्जी उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है। इसमें विटामिन सी, जिंक, आयरन, राइबोफ्लेविन, थायमिन, फॉस्फोरस और फाइबर जैसे आवश्यक पोषक तत्व होते हैं।
जलवायु और मिट्टी: गिलकी की खेती के लिए गर्म और आर्द्र जलवायु उपयुक्त होती है। इसे खरीफ और जायद दोनों मौसमों में उगाया जा सकता है। 35-38 डिग्री सेल्सियस तापमान इसके लिए आदर्श है। अच्छी जल निकासी वाली बलुई दोमट या दोमट मिट्टी, जिसका पीएच मान 6-7 हो, सर्वोत्तम मानी जाती है।
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मंडप की तैयारी: गिलकी की बेलों को सहारा देने के लिए मंडप तैयार करना आवश्यक है। इसके लिए 8 फीट ऊंचाई वाले 800 से 2000 मजबूत बांस के टुकड़े और लगभग 25 किलोग्राम प्लास्टिक की रस्सी की आवश्यकता होगी।
बीज की बुवाई: बीजों को 2-3 सेंटीमीटर गहराई पर बोया जाता है। पंक्तियों के बीच 1.5-2 मीटर और पौधों के बीच 60-90 सेंटीमीटर की दूरी रखें।
सिंचाई और देखभाल: नियमित सिंचाई आवश्यक है, विशेषकर फूल आने और फल बनने के समय। खरपतवार नियंत्रण और समय-समय पर मिट्टी की गुड़ाई से पौधों की वृद्धि में मदद मिलती है।
गिलकी की खेती से न केवल पोषक सब्जी का उत्पादन होता है, बल्कि यह आर्थिक दृष्टि से भी लाभकारी है।