आलू की खेती करने के लिए, ज़रूरी बातों का ध्यान रखना होता है.
1. भूमि की तैयारी (Land Preparation)
आलू के लिए उपजाऊ और अच्छी जल निकासी वाली भूमि आवश्यक होती है।
खेत की जुताई करें और मिट्टी को मुलायम और समतल करें ताकि आलू अच्छी तरह से उग सके।
मिट्टी में 2-3 बार हल्की जुताई करने के बाद, भूमि को समतल कर लें।
2. बीज की तैयारी (Seed Preparation)
आलू के बीज के लिए अच्छे गुणवत्ता वाले आलू का चयन करें। बीज के आलू का आकार मध्यम और स्वस्थ होना चाहिए।
आलू को छोटे टुकड़ों में काटें, प्रत्येक टुकड़े में एक से दो आंखें होनी चाहिए।
बीज आलू को रोपने से पहले 2-3 दिन सूखा लें ताकि वे स्वस्थ रहें।
3. रोपाई का समय (Planting Time)
आलू की खेती के लिए सबसे अच्छा मौसम सर्दी का होता है, यानी अक्टूबर से फरवरी तक।
रोपाई के लिए भूमि का तापमान 10 से 20 डिग्री सेल्सियस के बीच होना चाहिए।
4. बीज की रोपाई (Planting the Seed)
आलू के बीज को 8-10 इंच की गहराई में और 12-18 इंच की दूरी पर लगाएं।
बीज के आलू को खेत में डाला जाता है और फिर ऊपर से मिट्टी डाली जाती है।
5. सिंचाई (Irrigation)
आलू की फसल को नियमित रूप से सिंचाई की आवश्यकता होती है।
बहुत अधिक पानी से आलू सड़ सकता है, इसलिए सिंचाई में संतुलन बनाए रखें।
6. खाद और उर्वरक (Fertilization)
शुरुआत में जैविक खाद और उर्वरक का उपयोग करें।
मिट्टी की स्थिति के आधार पर नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का संतुलित मिश्रण दें।
7. खरपतवार नियंत्रण (Weed Control)
खेत में समय-समय पर खरपतवार हटाना जरूरी है ताकि पौधे को बढ़ने में कोई समस्या न हो।
खरपतवार को हाथ से या रासायनिक तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है।
8. रोग और कीट नियंत्रण (Pest and Disease Control)
आलू की फसल को विभिन्न रोगों और कीटों से बचाने के लिए समय-समय पर कीटनाशक का उपयोग करें।
आलू के प्रमुख कीटों में आलू मच्छर, टॉप ड्रॉपर आदि आते हैं।
9. कटाई (Harvesting)
आलू की फसल को जब पौधे की पत्तियाँ मुरझाने लगे और सूखने लगें, तब आलू की खुदाई की जाती है।
आलू को धीरे-धीरे निकालें ताकि वे नुकसान न हो।
10. संग्रहण (Storage)
आलू को ठंडी और सूखी जगह पर रखें। यदि सही तरीके से रखा जाए, तो आलू लंबे समय तक ताजे रहते हैं।