गिलकी (या तोरी) की खेती के लिए कुछ मुख्य बिंदु हैं:
गिलकी (या तोरी) की खेती के लिए कुछ मुख्य बिंदु हैं:
मौसम और स्थान:
गिलकी उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में अच्छी तरह से उगती है।
गर्मी और नमी की आवश्यकता होती है, इसलिए गर्मी के मौसम में सबसे अच्छी तरह से बढ़ती है।
भूमि का चयन:
अच्छे जल निकासी वाली हल्की बलुई या दोमट मिट्टी सर्वोत्तम होती है।
मिट्टी का pH 6 से 7 के बीच होना चाहिए।
बीज बुवाई:
गिलकी की बुवाई फरवरी से मार्च तक की जा सकती है।
बीजों को सीधे खेत में बोया जा सकता है, या फिर नर्सरी में उगाकर रोपाई की जा सकती है।
पानी की आवश्यकता:
गिलकी को नियमित पानी की आवश्यकता होती है, लेकिन जलभराव से बचना चाहिए।
शुरुआती दिनों में अधिक पानी की आवश्यकता होती है, लेकिन बढ़ने के बाद पानी की मात्रा कम की जा सकती है।
खाद और उर्वरक:
मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए, खेत में कंपोस्ट और रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग किया जा सकता है।
गिलकी की बढ़वार के लिए नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की सही मात्रा की आवश्यकता होती है।
सिंचाई:
सिंचाई की विधि में ड्रिप सिंचाई या नलकूप से सिंचाई की जा सकती है।
किट और रोग नियंत्रण:
गिलकी पर कीटों और रोगों का प्रकोप हो सकता है, जैसे सफेद मक्खी, फल सड़न और मोल्ड रोग।
जैविक कीटनाशकों या रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग करके इनकी रोकथाम की जा सकती है।
फसल की कटाई:
गिलकी की फसल को 2-3 महीने के भीतर काटा जा सकता है, जब फल छोटे, हरे और ताजे हों।
इन बिंदुओं का पालन करके आप गिलकी की खेती सफलतापूर्वक कर सकते हैं।